पाकिस्तान को दोहरी जिम्मेदारी मिलना हमारी विदेश नीति के पतन की दुखद दास्तां है : कांग्रेस

नयी दिल्ली/जयपुर. कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को कहा कि पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र में दो जिम्मेदारियां मिलना भारतीय विदेश नीति के पतन की दुखद दास्तां है, लेकिन वैश्विक समुदाय पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद के प्रायोजन को लगातार वैध ठहराना कैसे जारी रख सकता है? पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) तालिबान प्रतिबंध समिति के अध्यक्ष और यूएनएससी आतंकवाद विरोधी समिति के उप प्रमुख की जिम्मेदारी मिली है.

कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने एक्स पर पोस्ट किया, “ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 9 मई को आईएमएफ ने पाकिस्तान को एक अरब डॉलर दिए. ऑपरेशन सिंदूर के तुरंत बाद विश्व बैंक ने पाकिस्तान को 40 अरब डॉलर देने का फैसला किया. ऑपरेशन सिंदूर के तुरंत बाद 3 जून को एडीबी ने पाकिस्तान को 80 करोड़ डॉलर दिए. ” उन्होंने कहा कि अब 4 जून को पाकिस्तान को यूएनएससी तालिबान प्रतिबंध समिति के अध्यक्ष और यूएनएससी आतंकवाद विरोधी समिति के उप प्रमुख के रूप में चुना गया.
उन्होंने कहा, “बेशक, यह हमारी अपनी विदेश नीति के पतन की दुखद दास्तां है लेकिन वैश्विक समुदाय पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद के प्रायोजन को लगातार वैध ठहराने की अनुमति कैसे दे सकता है?”

प्रधानमंत्री जरूर जानते होंगे कि पहलगाम हमले के आतंकी गिरफ्त से बाहर हैं: कांग्रेस

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जम्मू कश्मीर दौरे से एक दिन पहले बृहस्पतिवार को कटाक्ष करते हुए कहा कि वह इस बात से जरूर अवगत होंगे कि पहलगाम आतंकी हमले को अंजाम देने वाले आतंकी आज भी न्याय की जद से बाहर हैं.

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “प्रधानमंत्री कल जम्मू-कश्मीर के दौरे पर होंगे. निश्चित रूप से वह जानते हैं कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए क्रूर आतंकवादी हमलों के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार आतंकी अभी भी नहीं पकड़े गए हैं.”

ऐसे प्रयास किए जाएं कि भारत, पाकिस्तान को एक ही पलड़े में नहीं तौला जाए: कांग्रेस
कांग्रेस ने पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र में दो जिम्मेदारियां मिलने पर बृहस्पतिवार को चिंता जताई और कहा कि सरकार द्वारा ऐसे कूटनीतिक प्रयास किए जाएं कि वैश्विक स्तर पर भारत और पाकिस्तान को एक ही पलड़े में नहीं तौला जाए. मुख्य विपक्षी दल ने यह भी कहा कि पाकिस्तान को दो अहम जिम्मेदारियां मिलना भारतीय विदेश नीति के पतन की दुखद दास्तां है, लेकिन वैश्विक समुदाय पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद के प्रायोजन को लगातार वैध ठहराना कैसे जारी रख सकता है? पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) तालिबान प्रतिबंध समिति के अध्यक्ष और यूएनएससी आतंकवाद विरोधी समिति के उप प्रमुख की जिम्मेदारी मिली है.

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, ”कांग्रेस अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान से पैदा होने वाले आतंकवाद पर भारत के रुख को समझने और उसका समर्थन करने का आ”ान करती है. पाकिस्तान आतंक का जनक है. भारत आतंक का शिकार है. दोनों की बराबरी नहीं की जा सकती. उन्हें एक तराजू के एक ही पलड़े में नहीं रखा जाना चाहिए.” उन्होंने कहा कि आईएमएफ, एडीबी और विश्व बैंक द्वारा ऋण और प्रोत्साहन पैकेज को मंजूरी देने या इसका निर्णय लेने से केवल पाकिस्तान के सैन्य खर्च में वृद्धि होगी, जिसका उपयोग उसकी सेना भारतीय नागरिकों के खिलाफ आतंक फैलाने के लिए करती है.

कांग्रेस अध्यक्ष का कहना है कि 15 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आतंकवाद रोधी समिति के उप प्रमुख और 2025 के लिए तालिबान प्रतिबंध समिति के अध्यक्ष के रूप में पाकिस्तान का नामकरण अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और अस्वीकार्य है. खरगे ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भारत के मामले में गुण-दोष देखना चाहिए कि पाकिस्तान को उसके आतंकी वित्तपोषण की निगरानी के लिए एफएटीएफ की ग्रे सूची में वापस शामिल किया जाना चाहिए.

उन्होंने इस बात का उल्लेख्र किया, ”पाकिस्तान को 2008 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमनोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार के समय भारत के राजनयिक प्रयासों के बाद 2008 में पहली बार ग्रे सूची में डाला गया था और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के तहत और फिर 2012 में शामिल किया गया था. यह तीन बार ग्रे सूची में रहा है, आखिरी बार 2018 में था.” खरगे ने इस बात पर जोरे दिया कि पाकिस्तान को उसके पापों के लिए जवाबदेह बनाना न केवल भारत के लिए, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के हितों के लिए जरूरी है.
उन्होंने कहा, ”शायद यह याद दिलाने की जरूरत है कि 9/11 हमले के लिए जिम्मेदार आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में पाया गया और खत्म कर दिया गया. 9/11 की योजना बनाने वाला खालिद शेख मोहम्मद भी ??पाकिस्तानी था.”

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ”एक जिम्मेदार विपक्षी दल के रूप में, हम अपनी सरकार से इसके लिए उचित और दृढ़ कूटनीतिक कदम उठाने का आग्रह करते हैं कि वैश्विक स्तर पर भारत और पाकिस्तान को एक ही पलड़े में नहीं तौला जाए.” कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 9 मई को आईएमएफ ने पाकिस्तान को एक अरब डॉलर दिए. ऑपरेशन सिंदूर के तुरंत बाद विश्व बैंक ने पाकिस्तान को 40 अरब डॉलर देने का फैसला किया. ऑपरेशन सिंदूर के तुरंत बाद 3 जून को एडीबी ने पाकिस्तान को 80 करोड़ डॉलर दिए.” उन्होंने कहा कि अब 4 जून को पाकिस्तान को यूएनएससी तालिबान प्रतिबंध समिति के अध्यक्ष और यूएनएससी आतंकवाद विरोधी समिति के उप प्रमुख के रूप में चुना गया. उन्होंने कहा, “बेशक, यह हमारी अपनी विदेश नीति के पतन की दुखद दास्तां है लेकिन वैश्विक समुदाय पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद के प्रायोजन को लगातार वैध ठहराने की अनुमति कैसे दे सकता है?”

रूसी अधिकारी ने बताया कि भारत-पाक संघर्ष के रुकने में ट्रंप की व्यक्तिगत भागीदारी: कांग्रेस

कांग्रेस ने एक रूसी अधिकारी के बयान का हवाला देते हुए बृहस्पतिवार को दावा किया कि अब रूस की तरफ से भी बता दिया गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत एवं पाकिस्तान के बीच संघर्ष को रोकने में व्यक्तिगत रूप से शामिल थे. क्रेमलिन के अधिकारी यूरी उषाकोव ने कहा है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर हाल में हुई बातचीत के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया सैन्य संघर्ष पर भी चर्चा की गई थी.

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”राष्ट्रपति पुतिन के सहयोगी यूरी उषाकोव ने अभी खुलासा किया है कि 4 जून को राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति ट्रंप की 75 मिनट की टेलीफोन पर हुई बातचीत में 4 दिवसीय भारत-पाकिस्तान संघर्ष का मुद्दा उठा. उषाकोव ने बताया है कि यह राष्ट्रपति ट्रंप की व्यक्तिगत भागीदारी थी जिसने भारत और पाकिस्तान के बीच सशस्त्र संघर्ष को रोक दिया.” कांग्रेस पिछले कुछ हफ्तों से बार-बार यह दावा कर रही है कि ट्रंप के दबाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ स्थगित किया.

बीते 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें अधिकतर पर्यटक थे. भारतीय सशस्त्र बलों ने छह मई की देर रात को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के कई आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया था. इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष हुआ और 10 मई को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ‘संघर्षविराम’ की घोषणा की. हालांकि भारत ने स्पष्ट किया कि किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता नहीं थी और पाकिस्तान के सैन्य अभियान महानिदेशक (डीजीएमओ) द्वारा अनुरोध किये जाने के बाद सैन्य कार्रवाई रोकी गई है.

पाकिस्तान के साथ संघर्ष विराम किन शर्तों पर हुआ, सरकार बताए : अशोक गहलोत
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने बृहस्पतिवार को कहा कि पाकिस्तान के साथ हालिया ‘संघर्ष विराम’ को लेकर जनता के मन में कई सवाल हैं, जिनका जवाब केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार को देना चाहिए. गहलोत के अनुसार जनता के मन में जो सवाल हैं उनमें से एक यह भी है कि ‘भारत और पाकिस्तान के बीच ‘संघर्ष विराम’ किन शर्तों पर हुआ?’ गहलोत ने पाकिस्तान के साथ हालिया संघर्ष विराम पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान का समर्थन करते हुए ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा, ”भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को समझना चाहिए कि देश के मन में जो सवाल है वही नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पूछ रहे हैं- “देश नहीं हारा, फौज नहीं हारी, फिर क्यों डरी सरकार हमारी.”

पूर्व मुख्यमंत्री ने लिखा, ”आखिर ट्रंप बार-बार कैसे भारत पर दबाव डालकर ‘संघर्ष विराम’ की बात कर रहे हैं?” उनके अनुसार राहुल गांधी लगातार देशवासियों के आक्रोश को सरकार के सामने रख रहे हैं कि जब ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना लगातार पाकिस्तान के ऊपर बढ़त ले रही थी तब ट्रंप के दबाव में आकर संघर्ष विराम क्यों किया गया.

उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि पहलगाम हमले के बाद देशवासियों में गुस्सा था जिसके अनुरूप सेना ने आतंकियों एवं उनके पनाहगार देश पाकिस्तान पर कार्रवाई शुरू की. पूरा विपक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में सरकार के साथ था एवं देश एकजुट होकर तैयार था कि इस बार आतंकवाद को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने के लिए सेना काम कर रही है. परंतु ट्रंप के ‘संघर्ष विराम’ वाले ट्वीट के कुछ मिनट बाद ही भारत सरकार ने संघर्ष विराम का ऐलान कर दिया. इससे पूरे देश में सरकार के प्रति नकारात्मक संदेश गया. उन्होंने लिखा कि अब भी देश की जनता के मन में ये सवाल हैं जिनके जवाब भाजपा सरकार को देने चाहिए. गहलोत ने सवाल किया कि अब तक पहलगाम हमले को अंजाम देने वाले आतंकवादी क्यों नहीं पकड़े गए हैं. उन्होंने सरकार से कई और सवाल भी किए.

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