नयी दिल्ली/वाशिंगटन/रांची/गुवाहाटी. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) समेत विभिन्न संगठनों के सैंकड़ों लोगों ने बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के साथ कथित रूप से हो रहे अत्याचार एवं उनके मावधिकारों के उल्लंघन के विरोध में यहां चाणक्यपुरी में मार्च निकाला.
इस विरोध मार्च के मद्देनजर बांग्लादेश उच्चायोग के ईद-गिर्द सुरक्षा कड़ी कर दी गयी है. यह उच्चायोग चाणक्यपुरी में ही है.
प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां थीं जिन पर इस मामले में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से हस्तक्षेप की मांग की गयी थी. उन्होंने बांग्लादेश से कथित हिंदू नरसंहार रोकने का भी आह्वान किया. ये प्रदर्शनकारी विभिन्न क्षेत्रों के लोग थे.
वीरेंद्र सिंह नामक एक प्रदर्शनकारी ने कहा,”बांग्लादेश में जो कुछ भी हो रहा है, हम उसे देख रहे हैं. हम पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों की निंदा करते हैं. हम बांग्लादेश को चेतावनी देते हैं कि वह देश में मानवाधिकारों का उल्लंघन तुरंत बंद करे.” बांग्लादेश की 17 करोड़ की जनसंख्या में हिंदू करीब आठ प्रतिशत हैं. शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार को पांच अगस्त को अपदस्थ किए जाने के बाद से बांग्लादेश के 50 से अधिक जिलों में हिंदुओं पर 200 से अधिक हमले होने के आरोप हैं.
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों के खिलाफ व्हाइट हाउस से ‘यूएस कैपिटल’ तक मार्च निकाला गया
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों के विरोध में बड़ी संख्या में भारतीय अमेरिकियों ने व्हाइट हाउस (अमेरिका के राष्ट्रपति का आधिकारिक कार्यालय एवं आवास) से लेकर यूएस कैपिटल (अमेरिकी संसद भवन) तक मार्च निकाला. ”हमें न्याय चाहिए” और ”हिंदुओं की रक्षा करो” जैसे नारे लगाते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों ने निवर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडन प्रशासन और नवनिर्वाचित डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से आग्रह किया कि वे बांग्लादेश की नयी सरकार से हिंदुओं की सुरक्षा के लिए कदम उठाने को कहें और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी करें. बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों के विरोध में सोमवार को यह मार्च निकाला गया.
इस कार्यक्रम के आयोजकों, ‘स्टॉपहिंदूजेनोसाइड.ओआरजी’, ‘बांग्लादेशी डायसपोरा ऑर्गेनाइजेशंस’ और ‘हिंदूएक्शन’ ने मांग की कि अमेरिका में स्थित कंपनियां बांग्लादेश से कपड़े खरीदना बंद करें, जो अमेरिका को किए जाने वाले निर्यात पर काफी हद तक निर्भर है.
‘हिंदूएक्शन’ के उत्सव चक्रवर्ती ने कहा, ”यह मार्च न्याय के लिए सिर्फ एक पुकार नहीं है, बल्कि यह जवाबदेही की मांग है. आज, बांग्लादेशी हिंदू समुदाय और भारतीय उपमहाद्वीप से बड़ा हिंदू प्रवासी बांग्लादेशी हिंदू समुदाय के समर्थन में आया है, क्योंकि बांग्लादेश विशेष रूप से चटगांव और रंगपुर क्षेत्र सहित देश के कुछ अन्य हिस्सों में हिंसा जारी है.”
चक्रवर्ती ने कहा, ”हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है, उनके मंदिरों को जलाया और नष्ट किया जा रहा है. उनके घरों को लूटा जा रहा है. चटगांव क्षेत्र के हिंदू संतों में से एक चिन्मय दास को जेल में डाल दिया गया है और उन्हें यातनाएं दी जा रही हैं. दुनिया भर में समुदाय इस बात से बेहद चिंतित है. इसलिए, लोग यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि व्हाइट हाउस और अमेरिका में लोगों को बांग्लादेश में क्या हो रहा है, इसकी जानकारी हो.”
वर्जीनिया से नरसिम्हा कोप्पुला ने कहा, ”हम बांग्लादेशी हिंदुओं के लिए न्याय मांगने के इरादे से व्हाइट हाउस के सामने एकत्र हुए हैं….” ‘हिंदूएक्शन’ के श्रीकांत अकुनुरी ने कहा कि बांग्लादेशी हिंदुओं के साथ अकल्पनीय त्रासदियां हो रही हैं. उन्होंने कहा, ”हम यह भी मांग करते हैं कि इस्कॉन के संत चिन्मय दास को रिहा किया जाए.” अटलांटिक सिटी के एक बांग्लादेशी सामुदायिक संगठन के प्रमुख प्रसेनजीत दत्ता ने इस्कॉन के संत चिन्मय दास की रिहाई की मांग की. ‘ग्लोबल हिंदू टेंपल नेटवर्क’ के अध्यक्ष मोहिंदर गुलाटी ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार इस अल्पसंख्यक समुदाय पर हमला है.
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले के खिलाफ झारखंड और असम में प्रदर्शन
पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर कथित हमलों के विरोध में मंगलवार को झारखंड और असम में विभिन्न संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया. झारखंड की राजधानी रांची में विभिन्न हिंदू संगठनों द्वारा एक विरोध मार्च आयोजित किया या जो मोरहाबादी मैदान से शुरू हुआ और अल्बर्ट एक्का चौक सहित शहर के विभिन्न हिस्सों से गुजरते हुए राजभवन के पास समाप्त हुआ.
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने तख्तियां ले रखी थी. इस दौरान बांग्लादेश की वर्तमान सरकार के खिलाफ नारे लगाए गए तथा हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास की तत्काल रिहाई तथा हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को रोकने की मांग की गई. सामाजिक कार्यकर्ता राकेश लाल ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है और मंदिरों में तोड़फोड़ की जा रही है.
मार्च के अंत में प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संबोधित एक ज्ञापन झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार को सौंपा गया. इसमें राष्ट्रपति से बांग्लादेश पर हिंदुओं पर हमले को रोकने के लिए ‘हस्तक्षेप’ की मांग की गई. असम में अंतराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के अवसर पर लोगों के एक समूह ने पड़ोसी देश में हिंदुओं के कथित उत्पीड़न के खिलाफ गुवाहाटी में बांग्लादेश के सहायक उच्चायुक्त कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया.
लोक जागरण मंच, असम के बैनर तले प्रदर्शनकारियों ने गुवाहाटी स्थित बांग्लादेश के सहायक उच्चायोग के माध्यम से बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को एक ज्ञापन भी सौंपा. बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस को संबोधित ज्ञापन में इस्लामी कट्टरपंथियों और सरकार दोनों पर देश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार करने का आरोप लगाया गया.
ज्ञापन सौंपने से पहले सिलपुखुरी स्थित नवग्रह काली मंदिर परिसर में एक विरोध बैठक आयोजित की गई, जिसमें बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति पर चर्चा की गई. इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने सिलपुखुरी की सड़कों पर जुलूस निकाला और बांग्लादेश के सहायक उच्चायोग के सामने धरना देने के बाद ज्ञापन सौंपा.
