भाजपा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से कहा, राहुल को बदलें, ईवीएम को नहीं

नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बुधवार को कहा कि कांग्रेस को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की वजह से नहीं बल्कि इसके नेतृत्व के खराब प्रबंधन की वजह से करारी हार मिली और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से कहा कि वह वोटिंग मशीन की जगह राहुल गांधी को ‘बदलने’ पर विचार करें.

ईवीएम पर कांग्रेस अध्यक्ष की हालिया टिप्पणी को लेकर उन पर निशाना साधते हुए भाजपा के लोकसभा सदस्य और राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि खरगे यदि इवीएम, निर्वाचन आयोग, प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय जांच ब्यूरो, न्यायपालिका और मोदी सरकार नहीं चाहते हैं तो राहुल गांधी को लेकर ‘मंगल ग्रह’ पर जा सकते हैं और वहां ‘खुशी से’ रह सकते हैं. सत्तारूढ़ पार्टी की प्रतिक्रिया खरगे द्वारा चुनावों में मतपत्र के उपयोग की वापसी की मांग करने के एक दिन बाद आई है.

खरगे ने इसके बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए भारत जोड़ो यात्रा की तर्ज पर एक ठोस अभियान का आह्वान भी किया था.
कांग्रेस अध्यक्ष ने मंगलवार को तालकटोरा स्टेडियम में ‘संविधान रक्षक अभियान’ को संबोधित करते हुए कहा था, ”उन्हें ईवीएम अपने पास रखने दीजिए. हम ईवीएम नहीं चाहते, हम बैलेट पेपर से मतदान चाहते हैं. तब उन्हें पता चलेगा कि उनकी स्थिति क्या है और वे कहां खड़े हैं.” पात्रा ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में हार पर अपनी हताशा निकाल रहे हैं.

उन्होंने यहां भाजपा मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “समस्या मशीन (ईवीएम) में नहीं है. समस्या नेतृत्व (कांग्रेस) के साथ है. ईवीएम ठीक है, राहुल खराब हैं. राहुल को बदलें, ईवीएम को नहीं.” पात्रा ने कहा, “आप आरबीएम के कारण चुनाव हार गए हैं, जिसका मतलब है कि राहुल का ‘बेकर प्रबंधन’.” भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि खरगे ईवीएम, निर्वाचन आयोग, प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय जांच ब्यूरो और न्यायपालिका नहीं चाहते हैं.

उन्होंने कहा, “आप भारत की मौजूदा सरकार भी नहीं चाहते क्योंकि आपको लगता है कि यह एक अच्छी सरकार नहीं है. आप कुछ भी नहीं चाहते हैं. तब मुझे लगता है कि मंगल ग्रह आपके लिए सबसे उपयुक्त स्थान है. कोई नहीं है वहां… आप वहां जाइए, शहजादा को कुर्सी पर बैठाइए और खुशी से जियें. भाजपा प्रवक्ता ने खरगे पर अपनी टिप्पणी के जरिए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के सदस्यों का अपमान करने का भी आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, “यह काफी आश्चर्यजनक है कि मल्लिकार्जुन खरगे ने कल कहा कि ईवीएम के कारण एससी, एसटी, ओबीसी और गरीबों के वोट बर्बाद हो रहे हैं.” भाजपा नेता ने पूछा, “क्या उन्हें लगता है कि एससी, एसटी, ओबीसी और गरीब समुदायों के लोगों को ईवीएम का उपयोग करना नहीं आता है?” पात्रा ने कहा कि खरगे ने ईवीएम पर टिप्पणी के साथ झारखंड में अपनी पार्टी के सहयोगी दल की जीत पर भी सवाल खड़े किए हैं.

उन्होंने कहा, “ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप लगाकर क्या आप यह कह रहे हैं कि झारखंड विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा की जीत एक तरह के कदाचार का नतीजा है और वे जीतने के लायक नहीं हैं. जब आप हारते हैं, तो यह दोषपूर्ण होता है.” पात्रा ने कहा कि कांग्रेस ईवीएम को खारिज करे या नहीं, जनता ने पार्टी को पूरी तरह दरकिनार कर दिया है. उन्होंने कहा, “झारखंड में भी कांग्रेस भाजपा से काफी पीछे है.”

संभल हिंसा में शामिल किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा, विपक्ष इसका राजनीतिकरण न करे: भाजपा

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बुधवार को कहा कि उत्तर प्रदेश के संभल जिले में हाल में हुई हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा. इसके साथ ही पार्टी ने विपक्षी दलों से इस मुद्दे का राजनीतिकरण न करने की अपील की. संभल जिले के कोट गरवी इलाके में शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के अदालती आदेश पर रविवार को हुई झड़प में चार लोगों की मौत हो गई और पुलिसर्किमयों समेत कई अन्य घायल हो गए. इसके बाद विपक्षी दल उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार और भाजपा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

भाजपा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने पार्टी मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन में इस बारे में पूछे जाने पर कहा, “यह बेहद संवेदनशील मुद्दा है. किसी को भी इसका राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए. मैं सभी से अपील करुंगा कि जांच चल रही है और जांच एजेंसियों को अपना काम पूरा करने दें.” उन्होंने कहा, “भारत में संविधान का शासन है. हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा.” संभल हिंसा का मुद्दा बुधवार को संसद में भी उठा. विपक्षी दलों ने इसे उठाया और दोनों सदनों की कार्यवाही सुबह एक बार और बाद में विपक्ष के लगातार हंगामे के कारण दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई.

संसद परिसर में संवाददाताओं से बात करते हुए समाजवादी पार्टी के नेताओं ने कहा कि वे संसद में संभल मुद्दे पर चर्चा करना चाहते हैं. उन्होंने मांग की कि संभल शहर में हिंसा की घटनाओं की किसी भी जांच की निगरानी उच्चतम न्यायालय द्वारा की जानी चाहिए.
सपा सांसद डिंपल यादव ने कहा, “हम संभल में हुई घटना पर चर्चा चाहते हैं. हमारे कई सांसदों ने इसे लेकर लोकसभा अध्यक्ष को नोटिस दिया है. हम लोगों के खिलाफ पुलिस और प्रशासन के अमानवीय व्यवहार के बारे में सदन के पटल पर बोलना चाहते हैं.” इस प्रकरण में उत्तर प्रदेश पुलिस ने 25 लोगों को गिरफ्तार किया है और सात प्राथमिकी दर्ज की हैं. इसमें संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जिया-उर-रहमान बर्क, स्थानीय विधायक इकबाल महमूद के बेटे सोहेल इकबाल और 2,750 से अधिक अज्ञात संदिग्धों के खिलाफ आरोप शामिल हैं.

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