अरुंधति रॉय की पुस्तक के आवरण पर धूम्रपान निषेध के खिलाफ चेतावनी है : अदालत मे प्रकाशक ने कहा

कोच्चि. केरल उच्च न्यायालय को बृहस्पतिवार को बताया गया कि बुकर पुरस्कार विजेता अरुंधति रॉय की पुस्तक ‘मदर मैरी कम टू मी’ के पिछले आवरण (कवर) पर धूम्रपान निषेध के खिलाफ एक चेतावनी (अस्वीकरण) दी गई है. पुस्तक के प्रकाशक ‘पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया’ की ओर से यह दलील एक वकील की याचिका के जवाब में दी गई है, जिसमें उच्च न्यायालय से पुस्तक के वर्तमान कवर के साथ इसकी बिक्री, प्रसार और प्रदर्शन पर रोक लगाने का आग्रह किया गया था क्योंकि कवर पर लेखिका को धूम्रपान (सिगरेट पीना) करते हुए दिखाया गया है.

याचिकाकर्ता (कोच्चि के वकील राजसिम्हन) ने अपनी याचिका में दावा किया कि पुस्तक के कवर पर कोई वैधानिक स्वास्थ्य चेतावनी नहीं थी. प्रकाशक द्वारा हलफनामे में दी गई दलील के मद्देनजर, मुख्य न्यायाधीश नितिन जामदार और न्यायमूर्ति बसंत बालाजी की पीठ ने राजसिम्हन से पूछा कि उन्होंने पुस्तक के पिछले कवर को देखे बिना ही याचिका क्यों दायर की.

अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले में याचिकाकर्ता के पास अन्य वैधानिक उपाय भी उपलब्ध हैं. याचिकाकर्ता के वकील द्वारा निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगे जाने पर सुनवाई सात अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दी गई. राजसिम्हन ने अपनी याचिका में तर्क दिया कि कवर पेज पर छपी तस्वीर धूम्रपान को ‘महिमामंडित’ करके समाज, खासकर लड़कियों और महिलाओं को एक ‘हानिकारक संदेश’ देती है.

उन्होंने यह भी तर्क दिया है कि यह तस्वीर सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद (विज्ञापन निषेध और व्यापार एवं वाणिज्य, उत्पादन, आपूर्ति और वितरण विनियमन) अधिनियम (सीओटीपीए), 2003 का भी उल्लंघन करती है. उनकी याचिका का विरोध करते हुए प्रकाशक ने अपने हलफनामे में कहा कि पुस्तक के पिछले कवर पर एक चेतावनी है, ”इस पुस्तक में धूम्रपान का कोई भी चित्रण केवल प्रतीकात्मक उद्देश्यों के लिए है. पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया तंबाकू के उपयोग को ब­ढ़ावा या समर्थन नहीं देता है.”

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