एफएमआर को समाप्त करने, भारत-म्यामां सीमा पर बाड़ लगाने के खिलाफ मणिपर में प्रदर्शन

चुराचांदपुर. भारत-म्यामां मुक्त आवागमन व्यवस्था (एफएमआर) को समाप्त करने के सरकार के फैसले के विरोध में मंगलवार को मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में प्रदर्शन किया गया. यूनाइटेड जो आर्गेनाजेशन (यूजेडओ) के नेतृत्व में यह प्रदर्शन पूर्वाह्न करीब 11.30 बजे ‘वॉल ऑफ रिमेंबरेंस’ पर शुरू हुआ.

एफएमआर को खत्म करने और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाड़ लगाने के सरकार के फैसले के खिलाफ पोस्टर और तख्तियां लिये प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की. एक प्रदर्शनकारी ने कहा, ”सीमा पर बाड़ लगाने से हमारे सांस्कृतिक संबंध खत्म नहीं हो सकते.” प्रदर्शन में सैकोट विधायक पाओलियनलाल हाओकिप, हेंगलेप विधायक लेटजामंग हाओकिप और सिंगनगाट विधायक चिनलुनथांग के अलावा कुकी-जो जनजातियों के विभिन्न नेता शामिल हुए.

राज्य में जारी जातीय हिंसा में मारे गए लोगों की स्मृति में कुछ पल का मौन भी रखा गया, जिसमें पिछले साल मई से 250 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है. कुकी जो काउंसिल, जोमी काउंसिल, कुकी इनपी मणिपुर और हमार इनपुई के नेताओं ने सभा को संबोधित किया. कार्यक्रम के अंत में, यूजेडओ नेताओं द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को संबोधित एक ज्ञापन डिप्टी कमिश्नर धरुण कुमार को सौंपा गया.

एफएमआर भारत-म्यामां सीमा के करीब रहने वाले लोगों को बिना किसी दस्तावेज के एक-दूसरे के क्षेत्र में 16 किलोमीटर तक जाने की अनुमति देता है. इसे समाप्त करने की घोषणा फरवरी में की गई थी जब शाह ने कहा था कि भारत ने मिजोरम, मणिपुर, नगालैंड और अरुणाचल प्रदेश से गुजरने वाली पूरी 1,643 किलोमीटर लंबी भारत-म्यामां सीमा पर बाड़ लगाने का फैसला किया है.

एफएमआर को भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के हिस्से के रूप में 2018 में लागू किया गया था. सीमा पर बाड़ लगाना इंफाल घाटी स्थित मेइती समूहों की लगातार मांग रही है, जो आरोप लगाते रहे हैं कि उग्रवादी अक्सर इस सीमा के माध्यम से भारत में प्रवेश करते हैं. मेइती समूहों का यह भी आरोप है कि बिना बाड़ वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा का लाभ उठाकर भारत में मादक पदार्थों की तस्करी की जा रही है.

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