नयी दिल्ली. तृणमूल कांग्रेस के नेता कल्याण बनर्जी वक्फ विधेयक पर विचार कर रही संसद की संयुक्त समिति की बैठक में मंगलवार को शामिल हुए और कहा कि उन्हें पिछले सप्ताह की बैठक के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद अभिजीत गंगोपाध्याय ने उकसाया था और कांच की बोतल फोड़कर फेंकने की उनकी कोई मंशा नहीं थी. बनर्जी ने यह भी कहा कि उन्होंने इस मामले पर खेद जता दिया है. वह निलंबन के कारण सोमवार को हुई समिति की पहली बैठक में शामिल नहीं हो सके थे.
बनर्जी ने मंगलवार को यहां संवाददाताओं से कहा, ”मैंने बैठक में कहा था कि समिति के अध्यक्ष पर इसे (टूटी बोतल) फेंकने की मेरी कोई मंशा नहीं थी और मुझे खेद है.” वक्फ संशोधन विधेयक पर विचार कर रही संसद की संयुक्त समिति की बैठक में बनर्जी ने कांच की बोतल तोड़कर समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल की ओर फेंक दी थी. इसके बाद उन्हें समिति की बैठक से एक दिन के लिए निलंबित कर दिया गया था.
भाजपा सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा सदस्य को सदन से निलंबित करने और उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी. उस दिन के घटनाक्रम पर पहली बार सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखते हुए बनर्जी ने कहा कि वह 22 अक्टूबर को वक्फ (संशोधन) विधेयक पर संसद की संयुक्त समिति की बैठक में गंगोपाध्याय को उनके आरोपों और व्यक्तिगत हमलों पर जवाब देने के लिए मजबूर थे.
टीएमसी नेता ने आरोप लगाया, ”जब गंगोपाध्याय बोल रहे थे, तो मैंने उनसे सवाल किया. फिर उन्होंने मेरे और मेरे परिजनों के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया. मैंने जवाब दिया, लेकिन उन्होंने अभद्र भाषा का इस्तेमाल जारी रखा….” बनर्जी ने आरोप लगाया कि अध्यक्ष का रुख उनके प्रति कठोर और गंगोपाध्याय के प्रति उदार था.
वरिष्ठ अधिवक्ता और टीएमसी नेता ने कहा, ”इससे निराशा हुई.. इसे (जिसने) शुरू किया, उसकी नहीं, बल्कि मेरी खिंचाई की गई…तब मैं निराश हो गया, नाराज नहीं था.” उन्होंने कहा कि उस समय उन्होंने अपने हाथ में पकड़ी हुई बोतल को तोड़ दिया और इससे उनकी उंगलियों में चोट आई.
बनर्जी ने कहा, ”जब मैं चोटिल हो गया, तो मुझे बोतल छोड़नी पड़ी और वह अध्यक्ष की ओर लुढ़क गई… दूसरे दिन ही मैंने बैठक में कहा कि मेरा इसे अध्यक्ष पर फेंकने का कोई इरादा नहीं था और मुझे खेद है.” टीएमसी नेता ने गंगोपाध्याय पर निशाना साधते हुए कहा कि कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में उनका रिकॉर्ड विवादास्पद था.
संसदीय समिति की बैठक में दिल्ली वक्फ बोर्ड के एक अधिकारी की प्रस्तुति पर विपक्षी सदस्यों के विरोध के बाद वक्फ संशोधन विधेयक संबंधी संसद की संयुक्त समिति ने मंगलवार को दिल्ली सरकार का पक्ष सुनने पर सहमति जताई. समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने दिल्ली सरकार का पक्ष सुनने का आश्वासन उस वक्त दिया, जब दिल्ली वक्फ बोर्ड के प्रशासक अश्विनी कुमार द्वारा समिति के समक्ष अपनी बात रखे जाने का विपक्षी सदस्यों संजय सिंह (आम आदमी पार्टी), मोहम्मद अब्दुल्ला (द्रमुक) और असदुद्दीन ओवैसी (एआईएमआईएम) ने विरोध किया.
विपक्षी सदस्यों का कहना था कि वक्फ बोर्ड के प्रशासक जो प्रस्तुति समिति के समक्ष देना चाहते हैं, उसे दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने मंजूरी नहीं दी थी. इस मुद्दे के कारण सोमवार को समिति की कार्यवाही रोक दी गई थी और लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह से इस मुद्दे पर राय मांगे जाने के बाद कुमार को बोर्ड के समक्ष अपने विचार रखने के लिए कहा गया था.
विपक्ष ने दिल्ली वक्फ बोर्ड के प्रशासक के रूप में एक गैर-मुस्लिम व्यक्ति की नियुक्ति पर भी सवाल उठाया और तर्क दिया कि कानून इसकी अनुमति नहीं देता है. भाजपा के एक सदस्य ने इस पर कहा कि पहले भी इन पदों पर गैर-मुस्लिम व्यक्तियों को नियुक्त किया गया है. इसके बाद तीनों विपक्षी सदस्य हॉल के केंद्र में जमा हो गए और लगभग एक घंटे तक नारे लगाते रहे, जिसके बाद पाल नरम पड़े और अपने प्रतिनिधि के माध्यम से इस मुद्दे पर दिल्ली सरकार का पक्ष सुनने के लिए सहमत हुए.
