संसद के शीतकालीन सत्र में नहीं लाया जाएगा चंडीगढ़ विधेयक : गृह मंत्रालय

नयी दिल्ली/चंडीगढ़. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रविवार को कहा कि संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में केंद्र के लिए ‘कानून निर्माण की प्रक्रिया को सरल’ बनाने वाले चंडीगढ़ संबंधी प्रस्तावित विधेयक को लाने का सरकार का कोई इरादा नहीं है. मंत्रालय ने साथ ही जोर देकर कहा कि इस प्रस्ताव का उद्देश्य चंडीगढ़ और पंजाब एवं हरियाणा के बीच पारंपरिक व्यवस्थाओं को बदलना नहीं है.

लोकसभा और राज्यसभा के बुलेटिन में एक दिसंबर से शुरू होने वाले आगामी सत्र के लिए 10 विधेयकों की अनंतिम सूची में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2025 को शामिल किए जाने के एक दिन बाद सरकार ने अपना रुख स्पष्ट किया. चंडीगढ़ को संविधान के अनुच्छेद 240 के दायरे में लाने संबंधी प्रस्ताव वाले इस विधेयक पर पंजाब के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की. यह अनुच्छेद राष्ट्रपति को केंद्र शासित प्रदेश के लिए नियम बनाने और सीधे कानून बनाने का अधिकार देता है.

मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “चंडीगढ़ के हितों को ध्यान में रखते हुए सभी हितधारकों के साथ पर्याप्त परामर्श के बाद ही कोई उपयुक्त निर्णय लिया जाएगा. इस मामले में किसी भी चिंता की कोई आवश्यकता नहीं है. केंद्र सरकार का संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में इस संबंध में कोई विधेयक पेश करने का कोई इरादा नहीं है.” मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने इस मामले पर उठाई गई चिंताओं को दूर करते हुए कहा, “केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के लिए केंद्र सरकार की कानून-निर्माण प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रस्ताव अब भी केंद्र सरकार के पास विचाराधीन है. इस प्रस्ताव पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है.”

मंत्रालय ने कहा कि प्रस्ताव किसी भी तरह से चंडीगढ़ के शासन या प्रशासनिक ढांचे में बदलाव करने का प्रयास नहीं करता और न ही इसका उद्देश्य ‘चंडीगढ़ और पंजाब या हरियाणा राज्यों के बीच पारंपरिक व्यवस्था’ को बदलना है. चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी है. विधेयक का उद्देश्य अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन और दीव, तथा पुडुचेरी (जब इनकी विधानसभा भंग या निलंबित हो) जैसे अन्य बिना विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों की तरह चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश को अनुच्छेद 240 में शामिल करना है. संविधान का अनुच्छेद 240 राष्ट्रपति को अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन और दीव, तथा पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेशों की शांति, प्रगति व प्रभावी शासन के लिए नियम बनाने की शक्ति प्रदान करता है.

अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ: चंडीगढ़ प्रशासन पर विवाद के बीच केंद्र ने कहा

चंडीगढ़ के प्रशासनिक ढांचे पर अपने कदम को लेकर आलोचनाओं के घेरे में आई केंद्र सरकार ने रविवार को कहा कि प्रस्ताव पर कोई आखिरी फैसला नहीं लिया गया है. इसने कहा कि इसका मकसद केंद्र शासित प्रदेश तथा पंजाब और हरियाणा के बीच पारंपरिक व्यवस्था को बदलना नहीं है.

चंडीगढ़ पर केंद्र के कदम को लेकर पंजाब में कई राजनीतिक दलों ने आपत्ति जताई है. आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इसे पंजाब की पहचान और संवैधानिक अधिकारों पर “सीधा हमला” बताया है.  घटनाक्रम को लेकर पंजाब में राजनीतिक दलों की तीखी प्रतिक्रिया के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि चंडीगढ़ में ”कानून बनाने को आसान करने” के प्रस्ताव पर कोई आखिरी फैसला नहीं लिया गया है. मंत्रालय ने कहा कि इसका उद्देश्य केंद्र शासित प्रदेश और पंजाब तथा हरियाणा के बीच पारंपरिक व्यवस्था को बदलना नहीं है.

गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, “प्रस्ताव केवल केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के लिए केंद्र सरकार के कानून बनाने की प्रक्रिया को आसान बनाने से संबंधित है और यह अब भी केंद्र सरकार के पास विचाराधीन है. इस प्रस्ताव पर कोई आखिरी फैसला नहीं लिया गया है.” इस प्रस्ताव को लेकर पंजाब के नेताओं की चिंताओं को दूर करते हुए, मंत्रालय ने कहा कि यह प्रस्ताव किसी भी तरह से चंडीगढ़ के शासन या प्रशासनिक ढांचे को बदलने की कोशिश नहीं करता और न ही इसका उद्देश्य ”चंडीगढ़ और पंजाब या हरियाणा राज्यों के बीच पारंपरिक व्यवस्थाओं” को बदलना है.

इसने कहा, “चंडीगढ़ के हितों को ध्यान में रखते हुए, सभी हितधारकों से अच्छी तरह सलाह-मशविरा करने के बाद ही कोई सही फैसला लिया जाएगा. इस मामले में किसी भी तरह की चिंता की कोई जरूरत नहीं है. केंद्र सरकार का संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में इस बारे में कोई विधेयक लाने का कोई इरादा नहीं है.” इस कदम से पंजाब में राजनीतिक हलकों में आक्रोश है. राज्य में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप), कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अगुवाई वाली केंद्र सरकार की आलोचना की है और सरकार पर पंजाब से चंडीगढ़ “छीनने” की कोशिश करने का आरोप लगाया है.

आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र के इस प्रस्तावित कदम का कड़ा विरोध किया और इसे पंजाब की पहचान तथा संवैधानिक अधिकारों पर ”सीधा हमला” बताया है. केजरीवाल ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”भाजपा की केंद्र सरकार द्वारा संविधान संशोधन के माध्यम से चंडीगढ़ पर पंजाब के अधिकार को खत्म करने की कोशिश किसी साधारण कदम का हिस्सा नहीं, बल्कि पंजाब की पहचान और संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है. संघीय ढांचे की धज्जियां उड़ाकर पंजाबियों के हक छीनने की यह मानसिकता बेहद खतरनाक है.”

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