स्वतंत्रता के बाद से चार श्रम संहिताएं सबसे व्यापक, प्रगतिशील सुधार: मोदी

नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि सरकार द्वारा अधिसूचित चार श्रम संहिताएं आजादी के बाद से सबसे व्यापक और प्रगतिशील श्रम-उन्मुख सुधार हैं जो श्रमिकों को सशक्त बनाएंगे. मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”इससे जहां नियमों का पालन करना बहुत आसान होगा, वहीं कारोबार में सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) को बढ़ावा मिलेगा.” ये चार श्रम संहिताएं – वेतन संहिता, 2019, औद्योगिक संबंध संहिता, 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशाएं संहिता, 2020 हैं. इनके जरिये 29 मौजूदा श्रम कानूनों को तर्कसंगत बनाया गया है.

मोदी ने कहा, ”ये संहिताएं हमारे लोगों, विशेष रूप से नारी शक्ति और युवा शक्ति के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा, न्यूनतम और समय पर मजदूरी भुगतान, सुरक्षित कार्यस्थल तथा लाभकारी अवसरों की मजबूत नींव का काम करेंगी.” उन्होंने कहा, ”ये श्रम संहिताएं भविष्य के अनुकूल श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करने वाला तथा भारत की आर्थिक वृद्धि को मजबूत करने वाला भविष्य के लिए तैयार परिवेश बनाएंगी. ये सुधार रोजगार सृजन को बढ़ावा देंगे, उत्पादकता को गति देंगे तथा विकसित भारत की हमारी यात्रा को तेज करेंगे.”

सरकार ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसले में चार श्रम संहिताओं को तत्काल प्रभाव से लागू करने की घोषणा की. इसमें गिग यानी अल्पकालिक अनुबंध पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा कवरेज, सभी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य नियुक्ति पत्र और सभी क्षेत्रों में वैधानिक न्यूनतम मजदूरी तथा समय पर भुगतान जैसे प्रावधान शामिल हैं. सुधारों में महिलाओं के लिए विस्तारित अधिकार और सुरक्षा शामिल हैं. इनमें रात्रि पाली में काम, 40 वर्ष से अधिक आयु के श्रमिकों के लिए मुफ्त वार्षिक स्वास्थ्य जांच, खतरनाक प्रक्रिया इकाइयों समेत पूरे भारत में ईएसआईसी कवरेज और एकल पंजीकरण, लाइसेंस प्रणाली शामिल हैं.

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