
जमशेदपुर. रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने टाटानगर रेलवे स्टेशन से 12 लड़कियों समेत 13 आदिवासी नाबालिगों को बचाया, जिन्हें दो कथित मानव तस्कर तमिलनाडु के सलेम में एक धागा निर्माण इकाई में काम करवाने के लिए ले जा रहे थे. अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी.
अधिकारियों ने बताया कि सोमवार को इन 13 नाबालिगों को देखभाल, सुरक्षा और पुनर्वास के वास्ते बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) को सौंप दिया गया, जबकि दो कथित मानव तस्करों को घाघीडीह न्यायिक हिरासत में केंद्रीय कारागार भेज दिया गया.
टाटानगर आरपीएफ के प्रभारी अधिकारी राकेश मोहन ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि मानव तस्करी-रोधी इकाई (एएचटीयू) के तहत आरपीएफ के उड़न दस्ते ने दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर मंडल के वरिष्ठ मंडलीय सुरक्षा आयुक्त पी शंकर कुट्टी से प्राप्त सूचना के आधार पर यह अभियान चलाया.
आरपीएफ अधिकारी ने बताया, ”रविवार को उन्हें (बच्चों को) टाटानगर स्टेशन से उस समय बचाया गया जब वे टाटानगर-एर्नाकुलम एक्सप्रेस में चढ़ने का इंतजार कर रहे थे. नाबालिगों ने दावा किया कि उन्हें तमिलनाडु के सलेम में एक धागा निर्माण इकाई में काम करने के लिए ले जाया जा रहा है.” सोमवार को आरपीएफ ने नाबालिगों और दो आरोपियों को टाटानगर राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) को सौंप दिया. दोनों आरोपियों की पहचान सुनील तातोम्बा (25 वर्ष) और जम्पिरा तातोम्बा (21 वर्ष) के रूप में हुई है और वे आपस में भाई हैं.
टाटानगर जीआरपी के प्रभारी अधिकारी जीतराम उरांव ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के हाटगम्हरिया प्रखंड के विभिन्न गांवों के 12 लड़कियों और एक लड़के को बाल कल्याण समिति को सौंप दिया गया है तथा हाटगम्हरिया में उनके रिश्तेदारों को सौंपने से पहले उनका बयान दर्ज करने के लिए जमशेदपुर दीवानी अदालत में पेश किया जाएगा.
उन्होंने कहा, ”पंद्रह से सत्रह वर्ष की आयु के ये नाबालिग फिलहाल बाल कल्याण समिति जमशेदपुर इकाई की देखरेख में हैं.” पश्चिमी सिंहभूम जिले के हाटगम्हरिया थाना क्षेत्र के अमडीहा पंचायत के दो आरोपियों को नाबालिगों की मानव तस्करी के आरोप में घाघीडीह केंद्रीय कारागार में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
