चमोली में भारत-तिब्बत सीमा पर पहली बार सैनिकों को कानूनी मदद के लिए शिविर का आयोजन

गोपेश्वर: उत्तराखंड के चमोली जिले की तिब्बत से सटी सीमा पर लगभग अठारह हजार फीट की ऊंचाई पर बाराहोती दर्रे के समीप रिमखिम क्षेत्र में तैनात सैनिकों की घरेलू समस्याओं के निराकरण में चमोली का जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कानूनी और प्रशासनिक मदद देगा।

प्राधिकरण के अधिकारियों ने मंगलवार को यहां बताया कि सीमांत चौकियों में तैनात इन जवानों के लिए हाल में पहली बार सीमा पर कानूनी साक्षरता और जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया जहां उन्होंने अपनी पारिवारिक समस्याओं और विवादों के संबंध में कानूनी परामर्श लिया।

उन्होंने बताया कि यह शिविर राष्ट्रीय विधिक सहायता प्राधिकरण के निर्देश पर आयोजित किया गया जिसमें प्राधिकरण के अधिकारी पहली बार अपने घरों से दूर रह रहे सीमा पर तैनात सैनिकों के पास पहुंचे। चमोली में प्राधिकरण के सचिव एवं सिविल जज, सीनियर डिवीजन पुनीत कुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘शिविर में सैनिकों एवं अर्द्धसैनिक बलों के जवानों और अधिकारियों से बातचीत की गई तथा इस दौरान हमारे परामर्शदाताओं ने उन्हें उनकी पारिवारिक समस्याओं और विवादों के लिए उपलब्ध कानूनी सुविधाओं की जानकारी दी।’’

उन्होंने बताया कि सीमा पर हुए इस कार्यक्रम के दौरान सैनिकों ने अपने पारिवारिक एवं वैवाहिक विवादों से संबंधित विवादों से जुड़ी समस्याएं रखीं। उन्होंने बताया कि संपत्ति खरीदने के बाद उससे जुड़े मामलों के लिए वे सीमा से बार—बार घर नहीं लौट पाते जिससे वे मामले लटके रहते हैं।

एक सैनिक ने बताया कि उन्होंने देहरादून में जमीन खरीदी है जिसके बाद दाखिल—खारिज से संबंधित उनका आवेदन लगभग दो साल से लंबित है । इस संबंध में सैनिक को अपनी समस्या पूरे विवरण के प्राधिकरण को भेजने की सलाह दी गयी जिससे उसके निराकरण की कार्यवाही शुरू की जा सके।

इसी प्रकार, शिविर में जम्मू-कश्मीर के एक जवान को उसके विवाह से जुड़े विवाद के निराकरण के लिए परामर्श दिया गया। प्राधिकरण ने सीमा पर तैनात जवानों को यह भी बताया कि प्राधिकरण में एक फ्रंट कार्यालय भी स्थापित किया गया है जहां नियुक्त एक रिटेनर अधिवक्ता से भी किसी समस्या के लिए विधिक परामर्श लिया जा सकता है।

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