पश्चिम उत्तर पाकिस्तान में टीटीपी के परिसर में विस्फोट से 24 लोगों की मौत

पेशावर. उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के एक परिसर में रखे विस्फोटकों में सोमवार को विस्फोट होने से महिलाओं और बच्चों समेत कम से कम 24 लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए. पुलिस ने यह जानकारी दी.
हालांकि, स्थानीय निवासियों ने दावा किया कि अफगानिस्तान की सीमा से लगे खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के खैबर जिले में तिराह घाटी के मतूर दारा इलाके में टीटीपी परिसर पर हवाई हमला किया गया. सरकार ने इस घटना के संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है.

पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ की प्रांतीय शाखा ने दावा किया कि तिराह घाटी में ‘विमानों से बमबारी’ ने पांच घर तबाह कर दिए. उसने कहा कि मलबे से 20 शव निकाले गए हैं. स्थानीय प्रशासन ने परिसर पर पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों द्वारा हवाई हमले के दावों का खंडन करते हुए कहा कि बम बनाने में इस्तेमाल होने वाले विस्फोटकों में विस्फोट हो गया, जिससे 14 आतंकवादियों समेत 24 लोगों की मौत हो गई.

तिराह पुलिस स्टेशन के थाना प्रभारी जफर खान ने बताया कि विस्फोट में 14 आतंकवादियों के साथ-साथ महिलाओं और बच्चों समेत कम से कम 10 आम नागरिक मारे गए. यह परिसर दर्जनों अफगान लड़ाकों सहित बड़ी संख्या में स्थानीय आतंकवादियों का ठिकाना रहा है. इसे परिष्कृत विस्फोटक उपकरण (आईईडी) के उत्पादन और स्नाइपर प्रशिक्षण का केंद्र माना जाता था.

स्थानीय लोगों ने इस मामले में सुरक्षा और जवाबदेही की मांग करते हुए बड़ा बाजार बंद करने की घोषणा की. प्रदर्शनकारियों ने सरकारी अधिकारियों पर नागरिकों की सुरक्षा में विफल रहने का आरोप लगाया और निर्वाचित प्रतिनिधियों से समुदाय की शिकायतों को दूर करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया.

खैबर से नेशनल असेंबली के सदस्य मोहम्मद इकबाल खान अफरीदी ने एक वीडियो संदेश में दुख व्यक्त करते हुए कहा कि ”विमानों द्वारा की गई गोलाबारी” में मारे गए लोगों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं. आतंकवादियों ने नागरिक आबादी के बीच केंद्र स्थापित कर लिए हैं और सुरक्षा बलों की पहुंच को सीमित करने के लिए विस्फोटकों का भंडार जमा कर रहे हैं. हालांकि, असुरक्षित भंडारण और प्रशिक्षण गतिविधियों के कारण, इन भंडारों में अक्सर विस्फोट हो जाता है, जिससे लोग हताहत होते हैं. साल 2021 में काबुल में तालिबान द्वारा सत्ता पर कब्जा करने के बाद से पाकिस्तान में आतंकवादी घटनाओं में वृद्धि हुई है, जिससे इस्लामाबाद की यह उम्मीद धूमिल हो गई है कि अफगानिस्तान में एक मित्रवत सरकार आतंकवाद से निपटने में मदद करेगी.

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