नयी दिल्ली. कांग्रेस ने लंदन में कार्यरत शिक्षाविद् फ्रांसेस्का ओरसिनी को वीज़ा शर्तों के कथित उल्लंघन के कारण दिल्ली हवाई अड्डे से वापस भेजे जाने के कुछ दिनों बाद बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि उन्हें देश में प्रवेश से रोकना कोई आव्रजन संबंधी औपचारिकता नहीं है, बल्कि “स्वतंत्र और गंभीर सोच रखने वालों के प्रति मोदी सरकार की शत्रुता की मिसाल” है.
गृह मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया कि हिंदी की विद्वान और ‘स्कूल ऑफ ओरियंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज’ (एसओएएस) में एमेरिट प्रोफेसर फ्रांसेस्का ओरसिनी को बीते सोमवार को हांगकांग से यहां पहुंचते ही निर्वासित कर दिया गया. उन्होंने बताया कि वीजा शर्तों के उल्लंघन के कारण ओरसिनी मार्च 2025 से ‘काली सूची’ में हैं.
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि दक्षिण एशियाई साहित्य की इस विद्वान को पांच साल का वैध वीज़ा होने के बावजूद भारत में प्रवेश से वंचित कर दिया गया है. उन्होंने आरोप लगाया, ”ओरसिनी को देश में आने से रोकने का फैसला आव्रजन औपचारिकता का मामला नहीं है, बल्कि स्वतंत्र, गंभीर सोच वाले विद्वानों के प्रति मोदी सरकार की शत्रुता का प्रतीक है.”
प्रधानमंत्री आसियान सम्मेलन के लिए नहीं जा रहे ताकि ट्रंप से सामना न हो: कांग्रेस
कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आसियान शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए मलेशिया नहीं जा रहे हैं क्योंकि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सामना नहीं करना चाहते. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह कटाक्ष भी किया कि प्रधानमंत्री शायद बॉलीवुड के मशहूर गाने ”बच के रहना रे बाबा” को याद कर रहे होंगे. प्रधानमंत्री मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह अगले सप्ताह मलेशिया में आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में वर्चुअल माध्यम से भाग लेंगे. मोदी ने फोन पर मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम को यह सूचना दी. दक्षिण-पूर्वी एशियाई राष्ट्रों के संगठन (आसियान) की बैठकें 26 से 28 अक्टूबर को होनी है.
मलेशिया ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ-साथ आसियान समूह के वार्ता साझेदार कई देशों के नेताओं को भी आमंत्रित किया है. ट्रंप 26 अक्टूबर को दो दिवसीय यात्रा पर कुआलालंपुर जाएंगे. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “पिछले कई दिनों से अटकलें थीं कि प्रधानमंत्री मोदी कुआलालंपुर सम्मेलन में जाएंगे या नहीं? अब यह तय हो गया है कि प्रधानमंत्री वहां नहीं जाएंगे.” उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि इसका मतलब है कि कई विश्व नेताओं से गले मिलने, फ.ोटो खिंचवाने और ख.ुद को विश्वगुरु बताने के कई मौक.े हाथ से निकल गए.
रमेश ने कहा ” प्रधानमंत्री मोदी के वहां नहीं जाने की वजह साफ. है कि वह राष्ट्रपति ट्रंप के सामने नहीं आना चाहते, जो वहां मौजूद होंगे. उन्होंने कुछ हफ़्ते पहले मिस्र में गाज.ा शांति शिखर सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण भी इसी वजह से ठुकरा दिया था.” उन्होंने कहा, “सोशल मीडिया पर राष्ट्रपति ट्रंप की तारीफ. में संदेश पोस्ट करना एक बात है, लेकिन उस व्यक्ति के साथ आमने-सामने होना दूसरी बात है, जिसने ऑपरेशन सिंदूर रोकने का दावा 53 बार किया है और पांच बार यह कहा है कि भारत ने रूस से तेल ख.रीदना बंद करने का वादा किया है… यह उनके लिए काफ.ी जोखिम भरा है.” रमेश ने तंज कसते हुए कहा, “प्रधानमंत्री शायद अब उस पुराने हिट बॉलीवुड गाने को याद कर रहे होंगे: बच के रहना रे बाबा, बच के रहना रे.”
